भोला मेरा डमरू बजा के चला

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोला मेरा डमरू बजा के चला,

भोला मेरा डमरू बजा के चला,

कष्टों को मेरे चुरा के चला,

कष्टों को मेरे चुरा के चला.......

भोले तेरी प्रीत मे जोगन हो गई,

गौरा की भी खबर तो तू ले,

अरज़ मैं करती हूँ चरणों मे बैठी हूँ,

मेरी तरफ इक नज़र देख ले......

भोले तेरी प्रीत मे जोगन हो गई,

गौरा की भी खबर तो तू ले,

अरज़ मैं करती हूँ चरणों मे बैठी हूँ,

मेरी तरफ इक नज़र देख ले.....

माथे पे चंदा सजा के चला,

तन मृग छाला पहन के चला,

भोला मेरा डमरू…..

हम्म्म्म……

भोला मेरा डमरू बजा के चला,

भोला मेरा डमरू बजा के चला,

कष्टों को मेरे चुरा के चला,

कष्टों को मेरे चुरा के चला…..

एक ही क्षण मे दीवानी हुई,

कल तक महलो की रानी जो थी,

कैसी की तूने जादूगरी भोले,

वन वन संग भटकने लगी,

नंदी सवारी बनाके चला,

अपनी जटाये लहराके के चला,

भोला मेरा डमरू बजा के चला,

भोला मेरा डमरू बजा के चला,

कष्टों को मेरे चुरा के चला,

कष्टों को मेरे चुरा के चला,

माथे पे चन्दन लगा के चला,

अंगों मे भस्म रमा के चला.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।