तेरे सिर पर गठरी पाप की

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

तेरे सिर पर गठरी पाप की, तेरे लगी भरम की भूल, भक्ति कर भगवान की......

भाई हरि भजन कर बावरे, लगा मनुष्य जन्म का दाव रे,

काया का खिल रहा फूल, भक्ति कर भगवान की,

तेरे सिर पर गठरी पाप की, तेरे लगी भरम की भूल, भक्ति कर भगवान की......

तने धर्म-कर्म सब खो दिया, बिन बात का झगड़ा झो दिया,

तेरी सारी रे बात फिजूल, भक्ति कर भगवान की,

तेरे सिर पर गठरी पाप की, तेरे लगी भरम की भूल, भक्ति कर भगवान की......

यह पांच विषय के भोग रे, हो भोग से पैदा रोग रे,

फिर अंत धूल में धूल, भक्ति कर भगवान की,

तेरे सिर पर गठरी पाप की, तेरे लगी भरम की भूल, भक्ति कर भगवान की......

तु माला रट गोपाल की, या तो बानी किरशन लाल की,

घट घट में खोल स्कूल, भक्ति कर भगवान की,

तेरे सिर पर गठरी पाप की, तेरे लगी भरम की भूल, भक्ति कर भगवान की......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।