दिल मईया दे मिलण नु करदा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ओ दिल मईया दे मिलण नु करदा,

मईया दे नवराते आ गए.....

मेरा दिल कहंदा चिठ्ठी मईया जी नू पा दवा,

ओ चिठ्ठी कागज वि ना लिखी जाए,

मईया दे नवराते आ गए,

ओ दिल मईया दे.....

चमड़ी उदेड़ के मैं कागज वनादियां,

ओ चिठ्ठी मईया जी दे मंदिरां च जावे,

मईया दे नवराते आ गए,

ओ दिल मईया दे.....

हड्डिया दी मैं कलम वनादियां,

ओ चिठ्ठी मईया जी दे मंदिरां च जावे,

मईया दे नवराते आ गए,

ओ दिल मईया दे.....

अस्सू दे महीने रुत दरशना दी आई ऐ,

छेती छेती आजा भगता देर कयों लगाई ऐ,

ओ तैनु याद करे महामाई दरशन पालै भगता,

ओ दिल मइया दे...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।