विघन विनाशत विघन हरत गणपति श्री गणेश

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

हरी ॐ

ईक औंकार को सिमरिऐ, मिट जाऐ सभी कलेश,

विघन विनाशत विघन हरत गणपति श्री गणेश ॥

भगवती संग पुजिऐ श्री बह्ममा विषणु महेश,

गुरू दासों का दास हुँ मोरे अंग संग रहो हमेश ॥

सरस्वती स्वर दिजिऐ स्वर के साथ ञान,

मै बेसुर बेताल हुँ मैय्या आप करो कल्याण ॥

मोरी रखियो लाज गुरू देव देव,

मोरी रखियो लाज गुरू देव -॥

बाबे मेरे हाल दा महरम तु,

अंदर तु है बाहर तु है मेरे रोम रोम विच तु ॥

तु ही ताना तु ही बाना,

सब किछ मेरा तु वे सांईया सब किछ मेरा तु ॥

कह हुसेन फकिर सांई दा, मै नाहीं सब तु ॥

ख्वाजा जी महाराजा जी -॥ तुम बनो गरीब निवास,

अपना कर के राखियो तोहे बाहं पकडे की लाज ॥

रह मन संसार मे सबसे मिलिऐ ध्याऐ,

ना जाने की भेस मे मोहे नारायण मिल जाऐ ॥

ञान ध्यान कुछ कर्म ना जाना सार ना जाना तेरी,

सबसे वड़ा धन सतगुरू नानाक जिन कल राखि मेरी ॥

जे मै वेखा अमला वले कुछ नहीं पले मेरे,

जे मै वेखां तेरी रहमत वले बल्ले बल्ले ॥

हरी ॐ........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।