जरा डमरु बजाओ

पारंपरिक
महादेव आरती शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जरा डमरु बजाओ शिव शंकर मैं पूजा करने आई हूँ,

मैं पूजा करने आई हूँ मैं आरती करने आई हूँ…..

मैं हाथों में चंदन रोली है मैं तिलक लगाने आई हूँ,

हो जरा डमरु बजाओ शिव शंकर मैं पूजा करने आई हूँ.......

मेरे हाथो में दूध का लोटा है मैं तुम्हें नहलाने आई हूँ,

हो जरा डमरु बजाओ शिव शंकर मैं पूजा करने आई हूँ......

मेरे हाथों में बेलपत्री है मैं तुम्हे चढाने आई हूँ,

हो जरा डमरु बजाओ शिव शंकर मैं पूजा करने आई हूँ......

मेरे हाथों में दिया और बाती है मैं आरती करने आई हूँ,

हो जरा डमरु बजाओ शिव शंकर मैं पूजा करने आई हूँ........

मेरे हाथों में फल और मेवा है मैं भोग लगाने आई हूँ,

हो जरा डमरु बजाओ शिव शंकर मैं पूजा करने आई हूँ.......

मेरे संग में भक्त ये सारे है मैं दर्शन करने आई है,

हो जरा डमरु बजाओ शिव शंकर मैं पूजा करने आई हूँ.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।