सिया राम का है स्वयंवर

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सिया को चढ़ रही आज हल्दी,

चोलो सखी जनकपुर जल्दी,

दूल्हा बने जय श्री राम,

बारात लेकर आ रहे जल्दी,

आज सिया राम का है स्वयंवर,

हर्ष रहे है गौरी शंकर,

आज सिया राम का है स्वयंवर,

हर्ष रहे है गौरी शंकर…..

हिलमिल जाबत पनिया भरनको,

सखिया संग सीता देखे राम को,

पनिया भरन का बहाना अच्छा,

पता न चल पाए, जिसमें रामको,

पर रामने जाना,

वैदेही हैं घुघट के अंदर,

आज सिया राम का है स्वयंवर,

हर्ष रहे है गौरी शंकर

आज सिया राम का है स्वयंवर,

हर्ष रहे है गौरी शंकर…..

सिया स्वयंवर में शुर वीर आये,

लंका के राजा रामन भी आये,

शिव धनुष कोई उठा तक पाये,

केवल राम धनुष को तोड़ पाये,

सिया केवल राम की,

ये बात केवल जाने शिवशंकर,

आज सिया राम का है स्वयंवर,

हर्ष रहे है गौरी शंकर,

आज सिया राम का है स्वयंवर,

हर्ष रहे है गौरी शंकर…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।