साईं तेरे चरणों की

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॥ पावन पाठ ॥

साई तेरे चरणों की बाबा तेरे चरणों की,

गर धूल जो मिल जाए,

सच कहता हूँ मेरी तकदीर बदल जाए.....

ये मन बड़ा चंचल है कैसे तेरा भजन करूं,

जितना इसे समझाऊ उतना ही मचल जाए,

साई तेरे चरणों की बाबा तेरे चरणों की,

गर धूल जो मिल जाए.......

सुनता हूँ तेरी रहमत दिन रात बरसती है,

एक बूंद जो मिल जाए दिल की कली खिल जाए,

साई तेरे चरणों की बाबा तेरे चरणों की,

गर धूल जो मिल जाए.......

नजरों से गिराना ना चाहे जितनी सजा देना,

नजरों से जो गिर जाए मुश्किल है संभल पाए,

साई तेरे चरणों की......

बाबा इस जीवन की बस एक तमन्ना है,

तुम सामने हो मेरे मेरा दम ही निकल जाए,

साई तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।