कंधे पे उठा लो कंवार भाई

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कोई पंजाब से कोई अम्बाला से,

कोई पटना से कोई पतलिया से कावरियो की टोली आई,

कंधे पे उठा लो कंवार भाई,

भगती में सब झूमो गाओ,

ढोलक और मिरदंग बजाओ,

भोले का जेकरा लगाओ बस आगे को भड़ते जाओ,

पुरे रोहतक से पुरे हरयाणा से पुरे अमृतसर से पुरे गुर्गोउन से,

भगती की चले पुर्वाही,

कंधे पे उठा लो कंवार भाई.....

भोले अपनी खोलो कवाडिया खावर लेकर आये कावारिया,

धूम मची है तेरी नगरिया प्यासी है दर्शन को नजरिया,

पुरे मेरठ में पुरे चंडीगढ़ में पुरे बरेली में अलीघड में तुजसे ये लगन लगाई,

कंधे पे उठा लो कंवार भाई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।