पार लगाओ भोलेनाथ मेरी नैया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पार लगाओ भोलेनाथ मेरी तो सागर में पड़ी नैया……

इस दुनिया में दो ही बड़े है,

पहले पिता दूजी मात मेरी तो सागर में पड़ी नैया……

मात मेरी ने जन्म दिया है,

पिता ने ढूढा घर बार मेरी तो सागर में पड़ी नैया……

इस दुनिया में दो ही बड़े है,

पहली ससुर दूजी सास मेरी तो सागर में पड़ी नैया……

पार लगाओ भोले पार लगाओ,

ससुर हमारे व्याह कर लाए,

सासू ने सौपा घर बार मेरी तो सागर में पड़ी नैया……

इस दुनिया में दो ही बड़े है,

पहले कर्म दूजे भोग मेरी तो सागर में पड़ी नैया……

कर्म हमारे साथ चलेगा,

भोग दिलाए बीवी याद मेरी तो सागर में पड़ी नैया……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।