ये राजा महाराजा है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव समान दाता नहीं,

विपद निवारण हार,

लज्जा मोरी राखियो,

श्री महाकाल सरकार…..

कृपा दयालु सब पर करता,

ऐसा मेरा बाबा है,

कृपा दयालु सताते करता,

ऐसा मेरा बाबा है,

पल में खाली झोलियां भरता यह राजा महाराजा है,

पल में खाली झोलियां भरता यह राजा महाराजा है,

यह राजा महाराजा है,

यह राजा महाराजा है…..

श्री महाकाल के शरण में आके,

काल भी शीश झुकाता है,

काल भी शीश झुकाता है,

काल भी शीश झुकाता है,

जब जाऊं मंदिर इनके,

लागे जनम जनम का नाता है,

जनम जनम का नाता है,

जनम जनम का नाता है,

श्री महाकाल के शरण में आके,

काल भी शीश झुकाता है,

जब जाऊं मंदिर इनके,

लागे जनम जनम का नाता है,

द्वार पर इनके जो भी आता बड़ी ही किस्मत वाला है,

द्वार पर इनके जो भी आता बड़ी ही किस्मत वाला है,

पल में भरता झोलियां खाली यह राजा महाराजा,

यह राजा महाराजा,

यह राजा महाराजा….

दरबार में इनके जो भी आता मन की मुरादे पाता है,

मन की मुरादे पाता है,

मन की मुरादे पाता है,

पल में बदलते भाग्य भगत का भोले भाग्य विधाता है,

भोले भाग्य विधाता है,

भोले भाग्य विधाता है,

दरबार में इनके जो भी आता मन की मुरादे पाता है,

दरबार में इनके जो भी आता मन की मुरादे पाता है,

पल में बदलते भाग्य भगत का भोले भाग्य विधाता है,

जो भी पाता इनके दर्शन,

बड़ी ही किस्मत वाला है,

पल में खाली हो लिया भरता यह राजा महाराजा,

यह राजा महाराजा…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।