मेरा मन रंग दो भोले बाबा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरा मन रंग दो भोले बाबा,

ओ भोले बाबा मेरे ओ भोले बाबा….

जिस रंग में तेरे गंगा रंगी है,

गंगा रंगी है तेरे सिर पे सजी है,

उसी रंग में रंग दो ओ भोले बाबा…..

जिस रंग में तेरा चंदा सजा है,

चंदा सजा है माथे पे सजा है,

उसी रंग में रंग दो ओ भोले बाबा…

जिस रंग में तेरा नाग रंग है,

नाग रंगा है तेरे गले में सजा है,

उसी रंग में रंग दो ओ भोले बाबा….

जिस रंग में तेरी गौरा रंगी है,

गौरा रंगी है तेरे संग में सजी है,

उसी रंग में रंग दो ओ भोले बाबा......

जसी रंग में तेरे गणपत रंगे है,

गगणपत रंगे है तेरी गोदी में सजे है,

उसी रंग में रंग दो ओ भोले बाबा…..

जिस रंग में तेरा नंदी रंगा है,

नंदी रंगा है तेरे द्वारे पे खड़ा है,

उसी रंग में रंग दो ओ भोले बाबा……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।