मुरली बाज रही मधुबन में

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मुरली बाज रही मधुबन में टुटा शिव शंकर का ध्यान,

शिव शंकर का ध्यान टुटा शिव शंकर का ध्यान……

कहाँ रहे मेरे भोले बाबा कहाँ रहे घनश्याम,

कैलाश पर्वत भोले बाबा गोकुल में घनश्याम,

मुरली बाज रही मधुबन में टुटा शिव शंकर का ध्यान…..

क्या पहने मेरे भोले बाबा क्या पहने घनश्याम,

मृग छाला तो भोले बाबा पिला पीताम्बर घनश्याम,

मुरली बाज रही मधुबन में टुटा शिव शंकर का ध्यान…..

क्या बजाये मेरे भोले बाबा क्या बजाये घनश्याम,

डमरू बजाये मेरे भोले बाबा मुरली बजाये घनश्याम,

मुरली बाज रही मधुबन में टुटा शिव शंकर का ध्यान…..

कौन संग मेरे भोले बाबा कौन संग घनश्याम,

गौरा संग मेरे भोले बाबा राधा संग घनश्याम,

मुरली बाज रही मधुबन में टुटा शिव शंकर का ध्यान…..

क्या खाये मेरे भोले बाबा क्या खाये घनश्याम,

भांग धतूरा मेरे भोले बाबा माखन खाये घनश्याम,

मुरली बाज रही मधुबन में टुटा शिव शंकर का ध्यान…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।