अबकी मोहन जल्दी आओ प्रेम की एकादशी

पारंपरिक
श्री गणेश भजन कृष्ण भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

अबकी मोहन जल्दी आओ प्रेम की एकादशी....

एकादशी में क्या क्या देखा, मैंने देखे गणपति जी,

दाएं हाथ में लड्डू बिराजे साथ में रिद्धि सिद्धि जी,

अबकी मोहन जल्दी आओ प्रेम की एकादशी......

एकादशी में क्या क्या देखा, मैंने देखे भोले जी,

दाएं हाथ में डमरू विराजे, संग में उनके गोरा जी,

अबकी मोहन जल्दी आओ प्रेम की एकादशी......

एकादशी में क्या क्या देखा, मैंने देखे विष्णु जी,

दाएं हाथ में चक्र विराजे, संग में उनके लक्ष्मी जी,

अबकी मोहन जल्दी आओ प्रेम की एकादशी......

एकादशी में क्या क्या देखा, मैंने देखे रामजी,

दाएं हाथ में धनुष विराजे,संग में उनके सीता जी,

अबकी मोहन जल्दी आओ प्रेम की एकादशी......

एकादशी में क्या क्या देखा, मैंने देखे कृष्ण जी,

बाएं हाथ में मुरली साजे,संग में उनके राधा जी,

अबकी मोहन जल्दी आओ प्रेम की एकादशी.....

एकादशी में क्या क्या देखा, मैंने देखी मैया जी,

दाएं हाथ में खप्पर विराजे, संग में उनके भैरव जी,

अबकी मोहन जल्दी आओ प्रेम की एकादशी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।