डम डम डमरू बाजे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ॐ शिवाय नमः शिवाय

ॐ शिवाय नमः शिवाय…...

आज शिवरात्रि की रात,

प्रेतों की बारात,

डमरू लेके भोलेनाथ,

अब हैं चल पड़े,

महाकाल सज धज के,

मुंडमाल से राज के,

नज़र ना लगे बच के,

शिव हैं चल पड़े,

भस्मा लगाके दोनो हाथ को उठा के,

सारे नाचेंगे आज,

डम डम डम,

डम डम डम डम,

डमरू बाजे,

धम धम धम,

धम धम,

धम धम,

भोला नाचे……..

शिवरात्रि आई है शिव की रात ये,

अर्जीयां लगा लो आज भोलेनाथ के,

काट देंगे पाप सारे जो भी है तेरे,

मांग लो जो मांगना है शंभु नाथ से,

आरती उतर रही,

खुश हैं माता पार्वती,

आगे हैं पशुपति नाथ जो मेरे,

आओ सारे मिलकर गाओ,

थोड़ी भांग तो पिलाओ,

रोकेगा कौन शंभु साथ जो मेरे,

भस्मा लगाके दोनो हाथ को उठा के,

सारे नाचेंगे आज,

डम डम डम,

डम डम डम डम,

डमरू बाजे,

धम धम धम,

धम धम,

धम धम,

भोला नाचे…....

प्रचण्डं प्रकष्ठं प्रगल्भं परेशं अखण्डं अजं भानु कोटि प्रकाशम ।

त्रयशूल निर्मूलनं शूल पाणिं भजेऽहं भवानीपतिं भाव गम्यम ॥

सांसे ये जो चल रही है तेरे नाम से,

धड़कने धडकती बाबा तेरे नाम से,

हूँ जहां पोहोंच गया मैं तू ही है वजह,

नाम मेरा भी है बाबा तेरे नाम पर,

आशुतोष शिव से बना जद्द वो है मैं हूं तना,

पूछे लोग रहता कहाँ चरणों में तेरे,

शिव गणों का दिन है आया,

शिव है सबमें समय राजा हो या रंक आज,

द्वार पर खड़े,

भस्म लगाके दोनो हाथ को उठा के सारे नाचेंगे आज,

डम डम डम,

डम डम डम डम,

डमरू बाजे,

धम धम धम,

धम धम,

धम धम,

भोला नाचे……..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।