माये मेरिये भंग घुटवांदा है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

माये मेरिये भंग घुटवानदा है,

जे ना घोटा ते डमरू बजांदा है,

भंग पी के समाधिया लांदा है.....

ना कोई ओहदी चुंगी झोपड़ी,

ना कोई महल चब्बारा,

माये मेरिये ओ मड़िया च रहन्दा है,

जे ना घोटा ते डमरू बजांदा है......

ना ओ पांदा लूंगी धोती,

ना कोई छाल बिछांदा,

माये मेरिये ओ मृगशाला पांदा है,

जे ना घोटा ते डमरू बजांदा है......

ना कोई ओहदा बहन भाई,

ना कोई साथ सबन्दी,

माये मेरिये ओ भूता संग रहन्दा है,

जे ना घोटा ते डमरू बजांदा है......

ना ओ खांदा माखन मिश्री,

ना कोई हलवा पूरी,

माये मेरिये ओ आक धतूरा खांदा है,

जे ना घोटा ते डमरू बजांदा है......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।