भोले इस सावन

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

के भोले इस सावन भी तेरे दरस न होंगे,

मेरे आँखो के ये आँसू और कितने बहेंगे…..

बेल की पत्तियों से हार भी बनाऊंगा,

तेरे चरनो पे वो दिल से चढ़ाऊंगा,

लेके गंगा जल तेरे माथे पे चढ़ाऊंगा,

सोचा था ये मान में अब मन में रह जायेगा,

के भोले खोल दे कपाट तेरे दर्शन दे दे,

मेरे आँखो के ये आँसू और कितने बहेंगे……

शीश की वो गंगा माथे की वो चंदा,

देखने को तरसे मन मेरा कबसे,

गौरी मैया तेरे संग कैसी लगती हैं,

एक बार देखो भोले मन मेरा बोले,

के भोले करदे कृपा तेरे दर्शन देदे,

मेरे आँखो के ये आँसू और कितने बहेंगे……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।