बेसहारों का है सहारा साई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन साईं भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बेसहरों का है साई,

बे सहारों का है सहारा साई,

सारी दुनियाँ का पालनहारा साई,

बड़ा अलबेला प्यारा प्यारा है हमारा साई……

साई बधू सखा पिता माता, साई सतगुरु हैं साई विधाता,

भावना जैसी मन में रही है साई वैसा नजर हमें आता,

प्रेम का सुन्दर का है नजारा साई,

बे सहारों का है सहारा साई,

बड़ा अलबेला प्यारा प्यारा है हमारा साई…..

दीप पानी से साई है जलाता नीम पे पात है मीठे बनाता,

आंच भक्तों पे आने ना पाए साई आटे की रेखा है बनाता,

घोर अँधियारों में है सितारा साई,

बे सहारों का है सहारा साई…….

साई सूखे गुलों को है खिलाता साई बिछड़े हुओं को है मिलता,

साई निर्धन को है धनवान करता साई काया को है कांचन बनाता,

दीन दुखियों का तारणहारा साई,

बे सहारों का है सहारा साई……

साई सबको गले से है लगाता साई भक्तों से है नाता निभाता,

साई बन जाता है सबका खिवैया साई भव पार है सबको कराता,

प्रेम भक्ति की पावन धारा दाई,

बे सहारों का है सहारा साई…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।