कलयुग आ गयो घोर

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॥ पावन पाठ ॥

बहना मेरी कलयुग आ गयो घोर,

धर्म धरती में समाए गयो रे.....

जो कहीं आ जाए बहुओं का भैया,

जल्दी से वह धरै कढईया,

बहना मेरी भांजे ठाडे द्वार भात को कोई ना दिवईया रे,

बहना मेरी कलयुग आ गयो घोर.....

आजकल के कुमार हजारी,

मात पिता को दे रहे गारी,

बहना मेरी जैसे आ जाए सास के मैंने कह कह बोले रे,

बहना मेरी कलयुग आ गयो घोर.....

जो ससुरे की बहना आवे,

भैया खोटे वचन सुनावे,

बहना मेरी जैसे साली आ जाएं वो राखी हाल बता मेरे,

बहना मेरी कलयुग आ गयो घोर.....

मात-पिता घर भूखे सोवे,

बहु बेटा होटल में खावे,

कन्हैया या कलयुग का अंत न जाने कब तक आवेगो,

बहना मेरी कलयुग आ गयो घोर.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।