मैं ना था किसी काम का

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं ना था किसी काम का,

बन ना सका मैं श्याम का,

पर इसने परबंध किया है,

मेरे हर आराम का,

कभी मैं देखू खुद को,

कभी मैं देखूं इनकी रहमत,

हम जैसों के लिए उठाता,

कौन है इतनी जहमत,

जिसका कोई वजूद ना होता,

वो बन जाता काम का,

मैं ना था किसी काम का,

बन ना सका मैं श्याम का......

देखी कई अदालत,

श्याम सी देखी ना कोई अदालत,

पहली बार में न्याय चुकता,

करनी ना पड़ती वकालत,

न्याय सदा ही सांचा होता,

खाटूवाले श्याम का,

मैं ना था किसी काम का,

बन ना सका मैं श्याम का.....

जिनका कोई नही है अपना,

श्याम को वो अजमाले,

सिर पे हाथ रहेगा श्याम का,

श्याम भजन तू गाले,

ऐसा झूमेगा पीकर तू,

श्याम नाम के जाम का,

मैं ना था किसी काम का,

बन ना सका मैं श्याम का......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।