जय जय श्री यमुना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय जय श्री यमुना, माँ जय जय श्री यमुना,

जोतां जनम सुधार्यो,

धन्य धन्य श्री यमुना, माँ जय जय श्री यमुना…..

शामलडी सुरत माँ मूरत माधुरी, माँ मूरत माधुरी,

प्रेम सहित पटराणी,

पराक्रमे पूरां, माँ जय जय श्री यमुना….

गहेवर वन चाल्या, माँ गंभीरे घेर्या, माँ गंभीरे घेर्या,

चुंदड़ीये चटकाणां,

पहेर्या ने लहेर्या, माँ जय जय श्री यमुना..

भुज कंकण रूडां, माँ गुजरीया चूडी, माँ गुजरीया चूडी,

बाजुबंध ने बेरखा,

पहोंची रत्न जड़ी, माँ जय जय श्री यमुना……..

झांझरने झमके, माँ विछीयाने ठमके, माँ विछीयाने ठमके,

नेपूरने नादे माँ,

घूघरी ने घमके, माँ जय जय श्री यमुना…….

सोणे शणगार सज्या, माँ नकवेसर मोती, माँ नकवेसर मोती,

आभूषणमां ओपो,

दर्पण मुख जोतां, माँ जय जय श्री यमुना…….

तट अंतर रूणां, माँ शोभित जल भरीयां, माँ शोभित जल भरीयां,

मनवांछित मुरलीधर,

सुंदर वर वरियां, माँ जय जय श्री यमुना……..

लाल कमल लपटया, माँ जोवाने ग्याता, माँ जोवाने ग्याता,

कहे 'माधव' परिक्रमा,

व्रजनी करवाने ग्याता, माँ जय जय श्री यमुना….

श्री यमुनाजी नी आरती, विश्राम घाटे थाय, माँ विश्राम घाटे थाय,

तेञीस करोड देवता,

माँ दर्शन करवा जाय, माँ जय जय श्री यमुना….

श्री यमुनाजी नी आरती जे कोई गाशे, माँ जे भावे गाशे,

तेना जनम जनमना संकट सर्वे दूर थाशे, तेनो व्रजमां वास थाशे…

जय जय श्री यमुना, माँ जय जय श्री यमुना,

जोतां जनम सुधार्यो,

धन्य धन्य श्री यमुना, माँ जय जय श्री यमुना………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।