ॐ गण गणपतये नमः

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

ॐ गण गणपतये नमः

श्री सिद्धिविनायक मोरया,

गणपति बप्पा मोरया,

मंगल मूर्ति मोरया....

तू ही धरती तू ही अंबर देवा,

प्यार का तुझमें समंदर भरा,

कदमों में थोड़ी सी देदे जगह,

नज़र ए क़रम हमपे करले ज़रा,

देवा हो देवा गणपति देवा,

रंगे हैं सभी रंग, तेरे रंग देवा,

देवा हो देवा गणपति देवा.....

हम सब पर तेरे बड़े एहसान हैं,

तुझसे ओ बप्पा ना कोई अंजान है,

भक्ति से तेरी

जो मिलता है वो शिष्ट है,

भक्तों को तेरे

ना छुटा अनिष्ट है,

किरपा है तेरी किस्मत ये मेरी,

संकट जो आए तू ही मेरी ढाल है,

देवा हो देवा गणपति देवा,

रंगे हैं सभी रंग, तेरे रंग देवा,

देवा हो देवा गणपति देवा.....

तू ही विघ्नहर्ता,

तू ही देव देवा,

तू मुक्तिदाय,

तू ही मृत्युंजय,

तु विश्वराज,

तू ही विश्वमुख,

तू गौरीसुता,

तू ही ईशानपुत्र.....

संकोच मन में ना कोई सवाल है,

अंधियारे जग में तू जलती मशाल है,

हो मूषक सवारी तेरी तू विशाल है,

कहलाता बप्पा तू बुद्धि विशाल है,

सामने तू आजा दर्श दिखाजा,

सुन भी ले ओ देवा हम सब की पुकार ये,

देवा हो देवा गणपति देवा,

रंगे हैं सभी रंग, तेरे रंग देवा,

देवा हो देवा गणपति देवा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।