घनश्याम राधे श्याम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

घनश्याम राधे श्याम,

भोर की प्रथम किरण हो तुम,

रात का अंत चरण हो तुम,

भोर की प्रथम किरण हो तुम,

रात का अंत चरण हो तुम,

तुम सुबह तुम श्याम,

घनश्याम राधे श्याम,

राधे श्याम घनश्याम……..

घनश्याम राधे श्याम,

राधा के हर सांसों में तुम,

मीरा के विश्वास में तुम,

राधा की हर सांस में तुम,

मीरा के विश्वास में तुम,

दोनो हृदय में श्याम,

घनश्याम राधे श्याम,

राधे श्याम घनश्याम……..

घनश्याम राधे श्याम,

तुम तो किशन कन्हैया हो,

तुम बंसी के बजैया हो,

तुम तो किशन कन्हैया हो,

तुम बंसी के बजैया हो,

तुम्हारे शत शत नाम,

घनश्याम राधे श्याम

राधे श्याम घनश्याम…..

घनश्याम राधे श्याम,

तुम्हारे द्वार जो आ जाए,

मन की शांति वो पा जाए,

तुम्हारे द्वार जो आ जाए,

मन की शांति वो पा जाए,

मिल जाए आराम,

घनश्याम राधे श्याम

राधे श्याम घनश्याम…...

घनश्याम राधे श्याम,

देव की नंदन मोहन हो,

सुंदर सरल हो सोहन हो,

देव की नंदन मोहन हो,

सुंदर सरल हो सोहन हो,

अपराजित विराण,

घनश्याम राधे श्याम

राधे श्याम घनश्याम…….

घनश्याम राधे श्याम,

तुम पूजा हो भक्ति हो,

हम भक्तो की शक्ति हो,

तुम पूजा हो भक्ति हो,

हम भक्तो की शक्ति हो,

निर्मल और निष्काम,

घनश्याम राधे श्याम,

राधे श्याम घनश्याम……..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।