बेटीयां बोझ होती नहीं

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॥ पावन पाठ ॥

बेटीयां बोझ होती नहीं,याद आती हैं ये विदा होने के बाद,

बेटे के मोह में ना भुलाना इन्हें,याद आती हैं ये विदा होने के बाद,

बेटीयां बोझ होती नहीं याद आती हैं ये विदा होने के बाद,

चार दिन के लिए घर में आई है ये,

कल चली याए गी हा पराई है ये,

इनकी यादो को दिल में छुपा ली जिए,

तडपती है यह बिधा होने के बाद,

बेटीयां बोझ होती नहीं............

माँ की हालत किसी से कही जाये ना,

जे जुदाई पिता से सही जाये न,

भाई के नैन भी कुछ येही कह रहे,

क्यों रुलाती है ये बिधा होने के बाद,

बेटीयां बोझ होती नहीं............

दो कुलो के चिरागों को रोशन करे,

कोई अपना न कभी इनका शोषण करे,

जुलम हर एक सहे मुख से ना कहे,

चल जाती है ये बिदा होने के बाद,

बेटीयां बोझ होती नहीं............

बेटियों को जो कहता ये बोज है,

बात है ये गलत बर्थ की सोच है,

इ मनुज इनसे है गोरव परिवार का,

निभाती है ये बिधा होने के बाद,

बेटीयां बोझ होती नहीं............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।