प्यारी हम तुम दोऊ एक कुंज के सख़ा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तरज़:-इक वादा किया है तेरे प्यार की कसम

प्यारी हम तुम दोऊ, एक कुंज के सख़ा,

राधे हम तुम दोऊ, एक कुंज के सख़ा,

रूठे क्यों पड़े, रूठे क्यों पड़े,

प्यारी हम तुम दोऊ, एक कुंज के सख़ा,

श्यामा......

यहाॅं नाहीं कोऊ, तेरो ओर मेरो,

जो यह पीर, झेले प्यारी जू,

रूठे क्यों पड़े, रूठे क्यों पड़े,

प्यारी हम तुम दोऊ, एक कुंज के सख़ा,

श्यामा......

हों तेरो बस, इक तूं मेरो

ओर को रीझ, सके प्यारी जू

रूठे क्यों पड़े, रूठे क्यों पड़े

प्यारी हम तुम दोऊ, एक कुंज के सख़ा

श्यामा......

हरिदास के स्वामी, श्यामा कुंज बिहारी जी,

कहत ना प्रित बनें प्यारी जू,

प्यारी हम तुम दोऊ, एक कुंज के सख़ा,

श्यामा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।