पितर जी भजन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

म्हे तो जल की झारी लिया खड्या पितरा न मिलना चाहिये,

पितरा का दोन्यूं हाथ बेटा के सिर पर रहना चाहिये।

म्हे तो भोजन थाली लिया खड्या पितरा न मिलना चाहिये,

पितरा का कोमल हाथ बहुवा के सिर पर रहना चाहिये।

म्हे तो दूध पतासा लिया खड्या पितरा न मिलना चाहिये,

पितरा का कोमल हाथ पोता के सर पर रहना चाहिये।

पितरा का कोमल हाथ पोतिया के सर पर रहना चाहिये,

म्हे तो पांचू कपड़ा लिया खड्या पितरा का कोमल हाथ सबा के सर पर रहना चाहिये।

म्हारी बाड़ी का रखवाला बाड़ी फुला भरनी चाहिये,

पितर जी म्हारे पूजन में आवो जी थे आय बिराजो जी म्हे धोक लगावा जी।

बोलो पितर जी महाराज की जय।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।