अजमत भारी अजमत भारी सिंगाजी

पारंपरिक
महादेव भजन विविध भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

अजमत भारी अजमत भारी क्या कहूं रे सिंगाजी तुम्हारी.....

पिपराड़ नदी जहाँ बहे बालगंगा,

जहाँ बिन ऋतू केरिया लागी अजमत भारी क्या कहूं रे सिंगाजी तुम्हारी,

अजमत भारी अजमत भारी.............

सदाशिव पय पान मगत हे, सदाशिव पय पान मगत हे,

जेने दुहि रे झोटी कुंवारी अजमत भारी क्या कहूं रे सिंगाजी तुम्हारी,

अजमत भारी अजमत भारी...........

झाबुआ देश भादरसिंह राजा झाबुआ देश भादरसिंह राजा,

जिनकी दय वाजुक फेरी अजमत भारी क्या कहूं रे सिंगाजी तुम्हारी,

अजमत भारी अजमत भारी...........

कहे जन दल्लू सुनो भाई साधो कहे जन दल्लू सुनो भाई साधो,

तुमने जम की फोज्या फेरी अजमत भारी क्या कहूं रे सिंगाजी तुम्हारी,

अजमत भारी अजमत भारी............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।