अब दया करो मेरे भोलेनाथ

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

अब दया करो मेरे भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

अब दया करो मेरे भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

मेरे सिर पर रख दो अपना हाथ,

मस्त रहो तेरी मस्ती में,

मेरे सिर पर रख दो अपना हाथ,

मस्त रहो तेरी मस्ती में,

अब दया करो मेरे भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में………

तेरे शीश पे गंगा बहती है,

मैं गोता लगाऊं सुबह शाम,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

अब दया करो मेरे भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

मेरे सिर पर रख दो अपना हाथ,

मस्त रहो तेरी मस्ती में………

तेरे माथे पर चंदा सजता है,

मैं दर्शन पाऊं सुबह शाम,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

अब दया करो मेरे भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

मेरे सिर पर रख दो अपना हाथ,

मस्त रहो तेरी मस्ती में………

तेरी गली में नागों की माला,

मैं दूध पिलाऊं सुबह शाम,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

अब दया करो मेरे भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

मेरे सिर पर रख दो अपना हाथ,

मस्त रहो तेरी मस्ती में………

तेरे हाथों में डमरु बजता है,

मैं धुन पर नाचूं सुबह शाम,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

अब दया करो मेरे भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

मेरे सिर पर रख दो अपना हाथ,

मस्त रहो तेरी मस्ती में………

तेरे संग में गौरा सजती है,

वरदान में पाऊं सुबह शाम,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

अब दया करो मेरे भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

मेरे सिर पर रख दो अपना हाथ,

मस्त रहो तेरी मस्ती में………

तेरी गोद में गणपत लाला है

पूजा में कर लूं सुबह शाम,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

अब दया करो मेरे भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

मेरे सिर पर रख दो अपना हाथ,

मस्त रहो तेरी मस्ती में………

तेरे संग में नंदी सोह रहे,

पर्वत पर घूमो तेरे साथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

अब दया करो मेरे भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

मेरे सिर पर रख दो अपना हाथ,

मस्त रहो तेरी मस्ती में………

अब दया करो मेरे भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

अब दया करो मेरे भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में,

मेरे सिर पर रख दो अपना हाथ,

मस्त रहो तेरी मस्ती में,

मेरे सिर पर रख दो अपना हाथ,

मस्त रहो तेरी मस्ती में,

अब दया करो मेरे भोलेनाथ,

मस्त रहूं तेरी मस्ती में………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।