मुंबई के राजा गणपति राजा

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

नाशिक की ढोल का,

बजाओ ढोल ताशा,

कर दो धमाल और,

बजाओ बैड बाजा,

बजाओ ढोल ताशा,

बजाओ बैड बाजा,

आये है आज मुंबई के राजा,

गणपति राजा, गणपति माझा,

मुंबई के राजा, गणपति राजा, गणपति माझा, गणपति राजा….

चौक लगाओ सिंहासन सजाओ,

हवन कि वेदी फूलों से सजाओ,

कलश जलाओ स्नान कराओ,

मोदक श्रीफल का प्रसाद लगाओ,

गणराज का दिल से ध्यान करके,

गणेश वंदना में समाजा,

गणपति राजा, गणपति माझा.....

देवा की रोज आरती कर लो,

यथाशक्ति जप तप कर लो,

ब्रत कीर्तन गणपति केकर लो,

यश धन से झोली अपनी भर लो,

संभलेंगे लम्बोदर दिल से सारे काम,

वस दुखड़ा कर दे तू साझा,

गणपति राजा, गणपति माझा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।