भोले बाबा पहाड़ों के राजा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सुन मेरे भोले बाबा,

मेरा मन ये तुझमे लागा,

प्रीत अपनी दिखाऊं कैसे,

प्रेम तुझसे छुपाऊं कैसे......

ओ भोले बाबा पहाड़ो के राजा कभी मेरे घर आजा रे,

ओ भोले बाबा पहाड़ो के राजा कभी मेरे घर आजा रे,

पूरी कब ये होंगी ये आशा भोले बाबा,

ओ भोले बाबा पहाड़ो के राजा कभी मेरे घर आजा रे…..

मै तेरी धुन पे हूँ नाचा,

जब तेरा डमरू है बाजा,

ह्रदय की है ताल तुमसे,

मेरी हर एक सांस तुमसे,

पूरी कब ये होंगी ये आशा भोले बाबा,

अरे ओ भोले बाबा पहाड़ो के राजा कभी मेरे घर आजा रे…..

सुन मेरे भोले बाबा,

मेरा मन ये तुझमे लागा,

प्रीत अपनी दिखाऊं कैसे,

प्रेम तुझसे छुपाऊं कैसे……..

चन्द्रमा मे तेज़ तुमसे,

पृथ्वी मे है ओज तुमसे,

सूर्य मे है अगन तुमसे,

मेरे मन की लगन तुमसे,

पूरी कब ये होंगी ये आशा भोले बाबा,

ओ भोले बाबा पहाड़ो के राजा प्रभू मेरे घर आजा रे…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।