माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल,

पैरी पवा के छाले मै ताँ आ गया तेरे कोल,

माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल,

दर्द तो खाली तेरे जेहा ना प्यार किथे ना लभे,

जिस पासे वी नजर घुमावां जान दे वैरी सबे,

मै निर्बल कमजोर बङा माँ हो गया डावांडोल,

माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल,

मै सुनया सब खैरा ले गये तेरे पावन दर तो,

हे दुनिया दीऐ दातीऐ मैनु ऐंवे ना मोङी दर तो,

कोई बहाना कर के वेखी करी ना टाल मटोल,

माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल,

दुखहरनी दुख मुसीबत तेरे ही हरेया हरदे,

निगाह सवंली होवे जे तेरी तां पत्थर वी तरदे,

वडंदे खजाना मेहर दा हुण वी द्वार दया दा खोल,

माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल,

तू मेरी मै तेरा भवानी फर्क भला है किथे,

असीं वी ओस थाँ क्यो ना रहीऐ तू माँ वसदी जिथे,

जी करदा निर्दोश बै के दुख सुख लईऐ खोल,

माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल,

माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल,

पैरी पवा के छाले मै ताँ आ गया तेरे कोल,

माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल,

माँ दी मुरतीऐ हँस के मेरे नाल बोल,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।