भोले ले चल काशी धाम

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

ओ भोले ले चल काशी धाम,

जहाँ विराजे गौरा रानी गणपति सरकार……

शीश भोले के जटा विराजे,

जटा विराजे जटा विराजे,

उनकी जटा से बहती रहती,

गंगा की ये धार,

ओ भोले ले चल काशी धाम……

गले भोले के रुणडो की माला,

रुणडो की माला रुणडो की माला,

उनके गले में लिपटा रहता,

विषधर काला नाग,

ओ भोले ले चल काशी धाम……

हाथ भोले के त्रिशूल विराजे,

त्रिशूल विराजे त्रिशूल विराजे,

उनके हाथ में बजता रहता,

डमरू चारो धाम,

ओ भोले ले चल काशी धाम……

पाँव भोले के खडाऊं विराजे,

खडाऊं विराजे खडाऊं विराजे,

उनके पैरो में बजती रहती,

घुंघरू की झंकार,

ओ भोले ले चल काशी धाम……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।