दौलत बरसे भोले के दरबार

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

झोली भरलो भगतों दौलत बरसे भोले के दरबार,

दातारी का क्या कहना है सरकारों की सरकार….

रंग रंगली महीना देखो सावन भोले बाबा का,

जैसे सावन बरसे वैसे बरसा दे भंडार,

झोली भरलो भगतों दौलत बरसे भोले के दरबार,

झोली भरलो जी….

देते-देते ये ना हारे तू लेते थक जायेगा,

भर-भर मुठी खूब लुटाये ऐसा है दातार,

झोली भरलो भगतों दौलत बरसे भोले के दरबार,

झोली भरलो जी….

बनवारी शिव के भगतों का देखा ठाठ निराला जी,

बारहों महीना मने दिवाली मौज करे परिवार,

झोली भरलो भगतों दौलत बरसे भोले के दरबार,

झोली भरलो जी….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।