सख़ी री मोहे लागे वृन्दावन प्यारा

मीरा बाई
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सख़ी री मोहे लागे वृन्दावन प्यारा

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राधे, श्याम श्याम श्याम, xllll-ll

सख़ी री मोहे लागे, वृन्दावन प्यारा ll

आली री मोहे लागे, वृन्दावन प्यारा l

लागे, वृन्दावन प्या,,,रा ll

सख़ी री मोहे लागे, वृन्दावन प्यारा l

आली री मोहे लागे, वृन्दावन प्यारा l

राधे, श्याम श्याम श्याम, राधे श्याम, xll-ll

मस्ती में झूमें, कदम की डाली ll

यमुना जी, का किना,,,रा l

सख़ी री मोहे लागे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

है रखवाला, स्वयं जहां का ll

नंद का, राज दुला,,,रा l

सख़ी री मोहे लागे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

मिटटी ब्रज की, माथ लगे तो ll

मिल जाए, सुख सा,,,रा l

सख़ी री मोहे लागे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

तन हो निर्मल, मन हो पावन ll

जाए जो, इक्क वा,,,रा l

सख़ी री मोहे लागे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

रास रचईया, कृष्ण कन्हईया

निज भक्तों, का सहा,,,रा l

सख़ी री मोहे लागे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

रतन सिंघासन, आप विराजे ll

मुकुट, तुलसी का धा,,,रा l

सख़ी री मोहे लागे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

मीरा के प्रभु, गिरधर नागर ll

भवजल, पार उता,,,रा l

सख़ी री मोहे लागे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

राधे, श्याम श्याम श्याम, राधे श्याम, xll-llll

हरी, बोल बोल बोल, हरी बोल, xll-llll

हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे l

हरे राम, हरे राम, राम राम हरे हरे llllllll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।