लम्बोदर पीताम्बर मनहारी

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

जाके पितु मात गौरी त्रिपुरारी,

मूषक कि जो करते हैं सवारी,

जाके पितु मात गौरी त्रिपुरारी,

मूषक कि जो करते हैं सवारी,

कहलाते है जो विघ्न हारी,

लम्बोदर पीताम्बर मनहारी,

कहलाते है जो विघ्न हारी,

लम्बोदर पीताम्बर मनहारी…….

धन वैभव यश विद्या पावे,

गणपति के गुणगान जो गावे,

धन वैभव यश विद्या पावे,

गणपति के गुणगान जो गावे,

सुमरे जो गणपति स्त्रोतम,

सर्व कार्य सिद्धि उसके हो जावे,

ऐसे विनायक के हर कोई बलिहारी,

कहलाते है जो विघ्न हारी,

लम्बोदर पीताम्बर मनहारी…….

रिद्धि सिद्धि संग गणपत विराजै,

अति आनंद तनमन में छाये,

रिद्धि सिद्धि संग गणपत विराजै,

अति आनंद तनमन में छाये,

शीश मुकुट माथे पे शोभित,

सिंघासन फल फूल से साजे,

गणपति की जो करे आरती,

पूरी होगी कामना ये तुम्हारी,

कहलाते है जो विघ्न हारी,

लम्बोदर पीताम्बर मनहारी…….

जाके पितु मात गौरी त्रिपुरारी,

मूषक कि जो करते हैं सवारी,

जाके पितु मात गौरी त्रिपुरारी,

मूषक कि जो करते हैं सवारी,

कहलाते है जो विघ्न हारी,

लम्बोदर पीताम्बर मनहारी,

कहलाते है जो विघ्न हारी,

लम्बोदर पीताम्बर मनहारी…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।