नसीबों वाले बंद मेरे दरवाजे खोल दे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरे सर पे भी माँ अपने हाथ रोल दे,

नसीबों वाले बंद मेरे दरवाजे खोल दे,

दो बोल मीठे प्यार के माँ तू भी बोल दे,

नसीबों वाले बंद मेरे दरवाजे खोल दे,

मेरे सर पे भी माँ.....

दरबार सजा हो तेरा माँ जगराता मैं गाऊँ,

बैठी हो भक्तों की पंगत और मैं भजन सुनाऊँ,

ऐसे मेरी जिव्हा को वाणी माँ लबों को बोल दे,

नसीबों वाले बंद मेरे दरवाजे खोल दे,

मेरे सर पे भी माँ.....

माँ महिमा का तेरी मैं अमृत सा पिए जाऊँ,

सदा सुनूं भजन तेरे और मैं यूं ही जिए जाऊँ,

भक्ति का रस माँ मेरे कानों में घोल दे,

भक्ति का रस माँ राजीव के कानों में घोल दे,

नसीबों वाले बंद मेरे दरवाजे खोल दे,

मेरे सर पे भी माँ.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।