गोरा थारी जान तो चढ़ी कांकड़ मे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव जी चाल्या परनबा भाई कर भूता को संग,

ब्रह्म विष्णु संग में भाई चढ्यो ब्याव को रंग ॥

आयो परनबा ने रंगीलो जोगी, आयो परनबा ने,

गोरा थारी जान तो चढ़ी कांकड़ मे रंगीलो,

जोगी आयो परनबा ने....

तगड़ा दिख्या जान बराती पाला, आया कोनी लाया घोड़ा हाथी,

सल्ला लोढ़ी लिया ये हाथ में भांग तो रगड़बा ने ।।१।।

अरे जोगी हाथ लिया छे डमरू, छम छम बाजे ये पगा में घुंघरू ।

डगमग हाले नाड़ आ गयो हाथ तो पकड़बा ने ।।२।।

बूढ़ा बिंद लटक री दाढ़ी, लारे बीस बरस की लाड़ी,

हिमाचल का लोग लुगाया लाग्या बाता तो करबा ने ।।३।।

कैया थारे बाबल के मन भायो वो तन जोगी के परनायो,

अब देखो मैया पार्वती लागी सजबा तो धजबा ने ।।४।।

माया महादेव की न्यारी, परने हेमाचाल की प्यारी,

भगवान सहाय पर किरपा कर मिला दे चुनड वाली ने ।।५।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।