चढ़ नीवीयां ऊचीया घाटीया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चढ़ नीवीयां ऊचीया घाटीया,

असीं आये तेरे दीदार नु ,

माँ जगदम्बे शेरावालीऐ ,

अज खोल दे भरे भण्डार नु,

चढ़ नीवीयां ऊचीया घाटीया...

तू है जनि जान भवानी ,

तेथो कोई गल लुकी नही,

मोह ममता दी अँख फङकदी,

कोई जग विच सुखी नही,

कोई होर ना जिस दा ऐ अासरा,

हुण कर दे बेङा पार तू,

माँ जगदम्बे शेरावालीऐ,

अज खोल दे भरे भण्डार नु,

चढ़ नीवीयां ऊचीया घाटीया....

तू दाती दया जिसदे कर दे,

उसदी ऊँची शान है सदा,

तेरी कृपा जिसदे होवे,

उसदा है जग विच मान बडा,

मै मैया दास अनजान हाँ,

सुनो माता जी मेरी पुकार नु,

माँ जगदम्बे शेरावालीऐ,

अज खोल दे भरे भण्डार नु,

चढ़ नीवीयां ऊचीया घाटीया.....

रिश्ते नाते झूठे सारे,

देख लये अजमा के मै,

तेरे दर ते आण डिगा माँ,

सब तों ठोकर खा के,

दिल दुखीया मेरा ऐहो चाहुंदा,

छढ़ देवा मतलबी झूठे संसार नु,

चढ़ नीवीयां ऊचीया घाटीया...

माँ तेरे बिन मुझ पापी नु दस हां कौन सम्बले गा,

बेअसरे नामाने पूत नु माँ बिन कहदा पाले गा

तेरे चरणा विच ऐहो अरज है मैया,

भुली ना चमन सेवादार नु,

माँ जगदम्बे शेरावालीऐ,

अज खोल दे भरे भण्डार नु,

चढ़ नीवीयां ऊचीया घाटीया

असीं आये तेरे दीदार नु

माँ जगदम्बे शेरावालीऐ

अज खोल दे भरे भण्डार नु

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।