भोलेनाथ का प्यार

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

साथ रह के भी सब है पराए,

दूर रह के भोले मुझे समाये,

साथ रह के भी सब है पराए,

दूर रह के भोले मुझे समाये,

मुस्किल में देना भोले तू साथ,

ओ भोलेनाथ,

ओ भोलेनाथ,

तुझसे मेरा ये कैसा है प्यार,

ओ भोलेनाथ,

ओ भोलेनाथ,

तुझसे मेरा ये कैसा है प्यार.....

ना पाई खुशी तो गम से जि लिए,

अड़चन भोले ने खुद से हल किए,

ना पाई खुशी तो गम से जि लिए,

अड़चन भोले ने खुद से हल किए,

मेरे शिव के बिन अधुरा रहा,

में बालक शिव का और वो है पिता…..

ओ भोलेनाथ,

ओ भोलेनाथ,

तुझसे मेरा ये कैसा है प्यार,

ओ भोलेनाथ,

ओ भोलेनाथ,

तुझसे मेरा ये कैसा है प्यार…….

न वेद पढ़ा न में गीता पढ़ा,

शिव नाम ही मेरे सर पे चढ़ा,

न वेद पढ़ा न में गीता पढ़ा,

शिव नाम ही मेरे सर पे चढ़ा…….

वेद भी करते हैं जिनको नमन,

मैं ऐसे शिव में रहता मगन………

ओ भोलेनाथ,

ओ भोलेनाथ,

तुझसे मेरा ये कैसा है प्यार,

ओ भोलेनाथ,

ओ भोलेनाथ,

तुझसे मेरा ये कैसा है प्यार.....

तेरी महिमा गा के नाम मिला,

तेरे भक्तो का ही प्यार मिला,

तेरी महिमा गा के नाम मिला,

तेरे भक्तो का ही प्यार मिला,

मांगू क्या तुझे से ओ मेरे दाता,

बिन मांगे तूने है इतना दिया......

ओ भोलेनाथ,

ओ भोलेनाथ,

तुझसे मेरा ये कैसा है प्यार,

ओ भोलेनाथ,

ओ भोलेनाथ,

तुझसे मेरा ये कैसा है प्यार…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।