धुना अज्ज वी धुखदा ए

पारंपरिक
महादेव भजन बाबा बालक नाथ भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

धुना अज्ज वी धुखदा ए,

जीथे नाथ ने अलख जगाई,

मेरे बाबा जी ने अलख जगाई,

पोनाहारी जी ने अलख जगाई,

जीथे मेले लगदे ने,

ओह पिंड है शाहतलाई,

धुना अज्ज वी धुखदा ए,

जीथे नाथ ने अलख जगाई......

तन ते भस्म रमा जोगी,

बनखंडी विच तुरिया जांदा ए,

हथ विच चिमटा फड़ के जोगी,

गीत शिवा दे गाउंदा ए,

ओस घर विच जा वडेया,

जीथे रेहदी रत्नों माई,

धुना अज्ज वी धुखदा ए,

जीथे नाथ ने अलख जगाई......

रत्नों रोटी लेके जांदी,

जोगी हाथ ना लौंदा सी,

ओह पोना दे नाल की गुजारे,

पोनाहार कहोंदा सी,

चिमटा मार के जोगी ने,

रोटी लस्सी कड विखायी,

धुना अज्ज वी धुखदा ए,

जीथे नाथ ने अलख जगाई......

किरपा जोगी दी जिस ते होजे,

उसदी किस्मत खिल जांदी,

मूसपुरिया लग के नाथ से चरनी,

सब नू मंजिल मिल जांदी,

प्रदीप दीवाना सिद्ध जोगी दा,

जिसने कलम चलाई,

धुना अज्ज वी धुखदा ए,

जीथे नाथ ने अलख जगाई......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।