गीता वेद पुराण

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भगवान् तुम्हारी इस दुनियाँ में, भक्तों की है शान,

गीता वेद पुराण यहाँ, गीता वेद पुराण,

यहाँ गीता वेद पुराण, यहाँ गीता वेद पुराण,

यहाँ गीता वेद पुराण, यहाँ गीता वेद पुराण,

भगवान् तुम्हारी इस दुनियाँ में……

नर रूप नारायण बन कर, रच डाला तूने गीता,

झूठे भ्रम शंसय अर्जुन का, महाधर्म युद्ध जीता,

जय हो वेद पुराण की, जय गीता रामायण की,

जय हो वेद पुराण की, जय गीता रामायण की,

धर्म युद्ध की शुभ वेला मैं,

धर्म युद्ध की शुभ वेला मैं,रखा भक्त का मान,

यहाँ गीता वेद पुराण, यहाँ गीता वेद पुराण,

यहाँ गीता वेद पुराण, यहाँ गीता वेद पुराण,

भगवान् तुम्हारी इस दुनियाँ में……

माया का भव जाल, जाल में उलझा था संसार,

गीता रूप गंगा जल पीकर, निर्मल हुआ संसार,

जय हो वेद पुराण की, जय गीता रामायण की,

जय हो वेद पुराण की, जय गीता रामायण की,

परम पिता तू सत्चित्यानन्द,

परम पिता तू सत्चित्यानन्द, सर्व शक्तिमान,

यहाँ गीता वेद पुराण, यहाँ गीता वेद पुराण,

यहाँ गीता वेद पुराण, यहाँ गीता वेद पुराण,

भगवान् तुम्हारी इस दुनियाँ में………

रिद्धि सिद्धि के दाता प्रभु, ॐ है शक्तिमान,

जन्म मरण का मर्म बताकर, दिया मोक्ष का ज्ञान,

जय हो वेद पुराण की, जय गीता रामायण की,

जय हो वेद पुराण की, जय गीता रामायण की,

रिद्धि सिद्धि के दाता प्रभु, ॐ है शक्तिमान,

जन्म मरण का मर्म बताकर, दिया मोक्ष का ज्ञान,

परमाणु के इस दुनियां में,

परमाणु के इस दुनियां में, गीता कवच समान,

यहाँ गीता वेद पुराण, यहाँ गीता वेद पुराण,

यहाँ गीता वेद पुराण, यहाँ गीता वेद पुराण,

भगवान् तुम्हारी इस दुनियाँ में………..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।