खा के डेडे ठोकरा माँ अा गये तेरे भवना ते

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

खा के डेडे ठोकरा माँ अा गये तेरे भवना ते,

सांनु अजे होये ना दीदार,

केहड़ी ऐसी खोट माँये साढे़या नसीबा विच,

बैठेया नु हो गये दिन चार

खा के डेडे ठोकरा माँ अा गये तेरे भवना विच...

माँ नही बाप नही कोई भैण नही भाई कोई नही

दुनिया विच साढां कोई होर ना,

किदे कोल खोल दईऐ तिद दीयां गंडा दस

किसे ऊते साडा कोई जोर ना,

असीं नहीओ देखेया माँ निगह कदे गोद वाला,

कूट का ला सीने ते देदे प्यार,

सांनु अजे होये ना दीदार.......

सुनया है तेनु लोकी कहिंदे जगत दाती,

तूहीओ इन सबदा सहारा ऐ,

फेर साडा नहियो मझधार विच फसया दा,

तेरे बिना दिसदा किनारा ऐ,

दुनिया तो मोह खा गई साड़ी नोच नोच ,

तुवी साडी सुनी ना पुकार,

सांनु अजे होये ना दीदार......

दिला दे जानदी ऐ दस एहने बच्चेया ने,

केङे ऐसे कर ले गुनाह ने,

भरी तेरी दुनिया विच सुने सुने फिरदे ने,

तेरे कोलो मगंदे पनाह ने,

रखी ए तू लाज इस बछड़े शिकंदर दी,

बाँ फङ ला सांनु वी तार,

सांनु अजे होये ना दीदार ........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।