घर जोत जगी माहारानी की

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

घर जोत जगी महारानी की ॥

अज नहीं जे नचना ते फेर कदो नचना,

अज कृपा होई वरदानी की,

अज नहीं जे नचना ते फेर कदोनचना ॥

मुदतां दे बाद घड़ी खुशियाँ दी आई ऐ,

घर साड़े मेहरां वाली मेहर वरसाई ऐ॥

अज कृपा होई वरदानी की,

अज नहीं जे नचना ते फेर कदो नचना ॥

खोल के भंडारे बेठी दाती सारे जग दी,

वंड़दी मुरादा देखो किनी चंगी लगदी॥

छाल चली नहिंओ जानदी वरदानी दी,

अज नहीं जे नचना ते फेर कदो नचना॥

दातिऐ जे आई ऐ ते हुन ऐथो जाई ना,

बच्चेयाँ दे नाल तू विछोड़ा कदे पाई ना ॥

चंचल रख लाज निमाणी दी,

अज नहीं जे नचना ते फेर कदो नचना ॥

घर जोत जगी महारानी की,

अज नहीं जे नचना ते फेर कदोनचना ॥

अज कृपा होई वरदानी की,

अज नहीं जे नचना ते फेर कदोनचना ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।