जै मैं होन्दा दाती ये मौर तेरे बागाँ दा

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जै मैं होन्दा दाती ये मौर तेरे बागाँ दा,

तेरी बागी पहलाँ पांदा,

तेनू नच्च के वखान्दा,

हो तेरे रज्ज-रज्ज दर्शन पांदा,

जै मैं होन्दा दाती ये मौर तेरे बागाँ दा...

छम-छम नचदा तेरे वेढे,

हर दम रहन्दा तेरे नेढे,

जै मैं होन्दा दाती ये फुल तेरे बागाँ दा..

तेरी माला विच्च लग जान्दा,

तेरे अंग-संग मुस्कान्दा,

हो.. तेरे रज्ज-रज्ज दर्शन पांदा,

जै मैं होन्दा दाती ये मौर तेरे बागाँदा...

तेरे चरणाँ तो बल्लिय्हारी,

वार देवाँ मैं खुशबु सारी,

जै मैं होन्दा दातीये बौढ तेरे मन्दिराँ दा,

झुले कंजकाँ नू झुलान्दा,

अपनी छाँ दे विच्च बैठान्दा,

तेरे रज्ज-रज्ज दर्शनपांदा,

जै मैं होन्दा दाती ये मौर तेरे बागाँदा,

आन्दे भगत माँ तेरे प्यारे,

रज्ज-रज्ज लेन्दे तेरे नजारे,

जै मैं होन्दा दातीये पत्थर तेरी गुफादा,

चरणी भगताँ दे लग जान्दा,

तेरी जय-जय कार बुलन्दा,

तेरे रज्ज-रज्ज दर्शन पांदा,

जै मैं होन्दा दाती ये मौर तेरे बागाँदा,

भगत तेरे माँ आँ दे जाँदे,

दाती तेरा नाम ध्याँदे,

जै मैं होन्दा दातीये नीर तैरी गांगा दा,

सब दे पाप मैं झौली पाँदा,

चंचल मन निर्मल हो जाँदा,

तेरे रज्ज-रज्ज दर्शन पांदा,

जै मैं होन्दा दाती ये मौर तेरे बागाँदा,

जै मैं होन्दा दाती ये मौर तेरे बागाँ दा...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।