अपने सूर्य स्वयं बन जाओ

पारंपरिक
सूर्य देव भजन विविध भजन surya
॥ पावन पाठ ॥

अपने सूर्य स्वयं बन जाओ,

बुझ न सके वो चिराग़ जलाओ,

अपने सूर्य.....

तुम हो दिव्य शक्ति के स्वामी,

बनो अग्रणी नहीं अनुगामी,

अपने ही अनुभव के बल पर,

सृजन आधार बनाओ,

अपने सूर्य.....

चलो न मिटते पदचिन्हों पर,

रुको न विघ्नों बाधाओं पर,

नित्य नए आलोक रश्मि से,

अपनी प्रतिभा जगाओ,

अपने सूर्य.....

जहां पर ब्रम्हज्ञानी जाते हैं,

त्याग तपस्या अपनाते हैं,

जागो अपने पौरुष से तुम,

अंतर दीप जलाओ,

अपने सूर्य.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।