जय हो जय हो तुम्हारी पितर देवता

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

जय हो जय हो तुम्हारी पितर देवता,

मेरे सर पे सदा तेरा हाथ रहे,

मेरे ब्रम्हा तुम्ही मेरे विष्णु तुम्ही,

तुम हो शंकर मेरे तेरा साथ रहे....

तेरे चरणों का जो भी है सेवक बना,

अपनी करूणा से उसकी बदल दी दशा,

तेरे चरणों का बनके में सेवक रहूं,

चाहे जैसे मेरे हालात रहे.....

जाने कब पूरी होगी ये अर्जी मेरी,

देके दर्शन भरोगे ये झोली मेरी ,

चाहूं करनी तेरी सेवा में उम्र भर,

सदा चरणो का बनके में दास रहूं....

कर दो कृपा थोड़ी में तो नादान हूं,

तेरी पूजा ना जानू में अनजान हूं,

जो भी श्रद्धा से लाया स्वीकार करो,

तुम सिंगला के सर पे तो हाथ धरो....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।