भोले जी मुझे ले चलो अपने द्वार

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

भोले जी मुझे ले चलो अपने द्वार,

ले चलो अपने द्वार,

भोले जी ले चलो अपने द्वार,

भोले जी मुझे....

संग आपके विराजे माता गौरा,

और संग में गजानन सरकार,

ले चलो अपने द्वार,

भोले जी मुझे....

आपकी जटाओं में विराजे गंगा,

और उसमें बहती पावन धार,

ले चलो अपने द्वार,

भोले जी मुझे....

संग आपके नंदी विराजे,

और गले सर्प विषधार,

ले चलो अपने द्वार,

भोले जी मुझे....

हाथ कमंडल त्रिशूल विराजे,

बाजे डमरू नाचे संसार,

ले चलो अपने द्वार,

भोले जी मुझे....

मुख मंडल पे तेज विराजे,

जो चरण गहें उनपे उपकार,

ले चलो अपने द्वार,

भोले जी मुझे....

ले चलो राजीव को अपने द्वार,

भोले जी शरण गहूं करो उपकार,

ले चलो अपने द्वार,

भोले जी मुझे....

©राजीव त्यागी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।