शिव का रूप

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय अमरनाथ जय विश्वनाथ,

जय बैद्य नाथ कैलाश नाथ,

शिव का रूप अनूप अति पावन,

शिव का रूप अनूप अति पावन,

अंग भुजंगम जटा विराजे,

शीश चंद्र छवि अनुपम साजे,

दर्शन है भव कुप उबारन....

शिव का रूप अनूप अति पावन,

शिव का रूप अनूप अति पावन,

बाल त्रिपुण्ड तन बाघम्बर,

वामांगी शिव शक्ति शुभंकर,

सुंदर सत्य स्वरुप सनातन,

शिव का रूप अनूप अति पावन,

शिव का रूप अनूप अति पावन,

हर हर हर महादेव,

ॐ नमः शिवाय,

हर हर हर महादेव,

ॐ नमः शिवाय....

शिव त्रिपुरारी त्रिकाल दर्शी,

देव त्रिनेत्र धारी,

शिव त्रिपुरारी त्रिकाल दर्शी,

देव त्रिनेत्र धारी,

तेजोमय शिव परम प्रकाशी,

कालबिंग का पुजारी,

शिव का रूप अनूप अति पावन,

शिव का रूप अनूप अति पावन.....

हर हर महादेव महादेव

हर हर महादेव महादेव

हर हर महादेव महादेव

हर हर महादेव महादेव

भस्म रमाए भंग सुहाए,

शिव की अद्भुत माया,

भस्म रमाए भंग सुहाए,

शिव की अद्भुत माया....

देवदनुज गण जिव हर एक कण,

सब में शिव ही समाया,

शिव का रूप अनूप अति पावन,

शिव का रूप अनूप अति पावन.....

भोलेनाथ भोलेनाथ,

भोलेनाथ भोलेनाथ,

गले मुंड माला सोही मृग छाला,

थाट हैं शिव के निराले,

गले मुंड माला सोही मृग छाला,

थाट हैं शिव के निराले,

निल कंठ शिव शिव महादानी,

देवो के भी रखवाले....

शिव का रूप अनूप अति पावन,

शिव का रूप अनूप अति पावन,

महादेव महादेव महादेव महादेव....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।