भजमन नारायण नारायण

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

चाहे तू जो आत्म ज्ञान,

भजमन नारायण नारायण,

कर अपने प्रभु का चिंतन,

कहीं बीत ना जाये जीवन,

चाहे तू जो आत्म ज्ञान,

भजमन नारायण नारायण…….

जग से क्या नेह लगाना,

बैरी जग छोड़ के जाना,

जग से क्या नेह लगाना,

बैरी जग छोड़ के जाना,

करले तू मालिक का ध्यान,

भजमन नारायण नारायण,

कर अपने प्रभु का चिंतन,

कहीं बीत ना जाये जीवन,

चाहे तू जो आत्म ज्ञान,

भजमन नारायण नारायण…….

चाहे जो आत्म शक्ति,

कर अपने प्रभु की भक्ति,

चाहे जो आत्म शक्ति,

कर अपने प्रभु की भक्ति,

तेरा हो जाये कल्याण,

भजमन नारायण नारायण,

कर अपने प्रभु का चिंतन,

कहीं बीत ना जाये जीवन,

चाहे तू जो आत्म ज्ञान,

भजमन नारायण नारायण…….

मालिक का सुमिरन कर ले,

भव से तू पार उतरले,

मालिक का सुमिरन कर ले,

भव से तू पार उतरले,

भक्ति से मिलते भगवान,

भजमन नारायण नारायण,

कर अपने प्रभु का चिंतन,

कहीं बीत ना जाये जीवन,

चाहे तू जो आत्म ज्ञान,

भजमन नारायण नारायण…….

धोले तू मैली चदरिया,

कहीं बीत ना जाये उमरिया,

धोले तू मैली चदरिया,

कहीं बीत ना जाये उमरिया,

अपने मालिक को पहचान,

भजमन नारायण नारायण,

कर अपने प्रभु का चिंतन,

कहीं बीत ना जाये जीवन,

चाहे तू जो आत्म ज्ञान,

भजमन नारायण नारायण…….

चाहे तू जो आत्म ज्ञान,

भजमन नारायण नारायण,

कर अपने प्रभु का चिंतन,

कहीं बीत ना जाये जीवन,

चाहे तू जो आत्म ज्ञान,

भजमन नारायण नारायण……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।