श्री शिवाय नमस्तुभ्यं

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।

उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥

परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।

सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥

वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।

हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥

एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।

सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं

आकाशे तारकम लिंगम, पाताले हाटकेश्वरम

मृत्युलोके महाकालं, त्रियलिंगम नमोस्तुते

कर्ता करे न कर सके, शिव करे सो होय

तीन लोक नौ खंड में, महाकाल से बड़ा न कोय

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।