बालाजी का सुमिरन कर ले

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

बालाजी को सुमिरन कर ले,

तो काम थारो हो जासी,

भक्ति को जोर लगा ले रे,

वरना पाछे पछतासी,

बालाजी को सुमिरण कर ले,

तो काम थारो हो जासी.....

तू तो मस्ती में खोयो रे,

तू तो जी भर के सोयो रे,

थारो काम नहीं होयो रे,

पक्को जोर तू नाही लगायो,

भक्ति को तू जोर लगा ले,

थोड़ी मजबूती तो ल्या रे,

नहीं तो यमड़ो जूता मारे,

वो तो पुछेलो के ल्यायो,

कर ले तू बाला से यारी,

थारी टल जासी रे फांसी,

थारी टल जासी रे फांसी,

बालाजी को सुमिरण कर ले,

तो काम थारो हो जासी.....

के है बेटो के है नारी,

के कर लेसी रिश्तेदारी,

झूठी दुनियादारी सारी,

भाया कोई नहीं है थारो,

थारी कोठ्या महल अटारी,

रह जासी रे अठै ही सारी,

कर ले आगे की तैयारी,

तेने ले जासी बिणजारो,

बस नाम सहारो ही सांचो,

परलोक में काम वो आसी,

परलोक में काम वो आसी,

बालाजी को सुमिरण कर ले,

तो काम थारो हो जासी…….

बालाजी को सुमिरन कर ले,

तो काम थारो हो जासी,

भक्ति को जोर लगा ले रे,

वरना पाछे पछतासी,

बालाजी को सुमिरण कर ले,

तो काम थारो हो जासी…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।